श्रीकृष्ण जन्माष्टमी में तीन संयोग एक साथ
August 23rd, 2019 | Post by :- | 188 Views

रोहिणी नक्षत्र में जन्माष्टमी पर लौहनगरी कृष्णमयी होने लगा है। 23 अगस्त को जन्माष्टमी व्रत है तो 24 अगस्त को कृष्णाष्टमी का व्रत है। ईस्कॉन समेत कई मंदिर कमेटी और संस्थाएं जन्माष्टमी को यादगार बनाने की तैयारी की हैं। जन्माष्टमी पर ग्रह गोचरों का महासंयोग वरदान होगा। इस तिथि पर छत्र योग, सौभाग्य सुंदरी योग और श्रीवत्स योग बन रहा है। पूजन और व्रतियों के लिए फलदायी सिद्ध होगा। 14 वर्षों के बाद तीन संयोग एक साथ बना है। जन्माष्टमी के समय सूर्य देव अपनी सिंह राशि में रहेंगे।

कुछ पंचांग में 23 अगस्त को और कुछ में 24 अगस्त को जन्माष्टमी की तिथि बताई गई है। जबकि श्रीकृष्ण की जन्म स्थली मथुरा में 24 अगस्त को जन्माष्टमी मनाई जाएगी। जिन लोगों के लिए अष्‍टमी तिथि का महत्‍व सबसे ज्‍यादा है वह 23 अगस्त को जन्माष्टमी मनाएंगे। इस दिन भगवान कृष्ण की पूजा आधी रात को की जाती है। यहां जानें कृष्ण जयंती की पूजा विधि और शुभ मुहूर्त…

जन्माष्टमी का शुभ मुहूर्त- जन्‍माष्‍टमी के दिन सुबह स्‍नान के बाद भगवान के समक्ष व्रत का संकल्‍प लेते हुए अगले दिन रोहिणी नक्षत्र और अष्‍टमी तिथि के समाप्त होने के बाद व्रत खोल सकते हैं। कृष्‍ण की पूजा नीशीथ काल यानी कि आधी रात में किये जाने की परंपरा है…
निशिथ पूजा– 00:01 से 00:45
पारण– 05:59, 24 अगस्त, सूर्योदय के बाद
रोहिणी समाप्त- सूर्योदय से पहले
अष्टमी तिथि प्रारंभ– 08:08, 23 अगस्त
अष्टमी तिथि समाप्त – 08:31, 24 अगस्त

श्रीकृष्ण देंगे वरदान- इस दिन श्रीकृष्ण की पूजा करने से संतान प्राप्ति, आयु तथा समृद्धि की प्राप्ति होती है- श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाकर हर मनोकामना पूरी की जा सकती है- जिन लोगों का चंद्रमा कमजोर हो वे आज विशेष पूजा से लाभ पा सकते हैं- इस बार जन्माष्टमी 24 अगस्त को मनाई जाएगी.
कैसे करें जन्माष्टमी के लिए श्रीकृष्ण की मूर्ति का चुनाव?- सामान्यतः जन्माष्टमी पर बाल कृष्ण की स्थापना की जाती है.- आप अपनी आवश्यकता और मनोकामना के आधार पर जिस स्वरुप को चाहें स्थापित कर सकते हैं.- प्रेम और दाम्पत्य जीवन के लिए राधा कृष्ण की , संतान के लिए बाल कृष्ण की और सभी मनोकामनाओं के लिए बंशी वाले कृष्ण की स्थापना करें .- इस दिन शंख और शालिग्राम की स्थापना भी कर सकते हैं.

इनके भोग के लिए क्या व्यवस्था करें?- पंचामृत जरूर बनाएंगे, उसमे तुलसी दल डाला जाएगा- मेवा,माखन और मिश्री की व्यवस्था भी कर सकते हैं- कहीं कहीं, धनिये की पंजीरी भी अर्पित की जाती है.- पूर्ण सात्विक भोजन, जिसमे तमाम तरह के व्यंजन हों , इस दिन श्री कृष्ण को अर्पित किये जाते हैं.
जन्माष्टमी के दिन की शुरुआत कैसे करेंगे?- प्रातःकाल स्नान करके व्रत या पूजा का संकल्प लें- दिन भर जलाहार या फलाहार ग्रहण करें , सात्विक रहें- दिन भर भगवान के स्थान की सज्जा करें- मुख्य द्वार पर वंदनवार जरूर लगाएं- मध्यरात्रि के भोग और जन्मोत्सव के लिए व्यवस्था करें- आप व्रत रखें या न रखें, घर में सात्विक आहार का ही प्रयोग करें.

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