तकलीफ आज मगर अल्ट्रासाउंड के लिए तारीख पर तारीख #news4
April 23rd, 2022 | Post by :- | 121 Views

चंबा : पिछड़े जिलों में शुमार चंबा जिला के स्वास्थ्य संस्थानों में क्या सुविधाएं मिल रही हैं, इसकी पोल चंबा मेडिकल में खुली है। मरीज अपनी तकलीफ को लेकर मेडिकल कालेज के डाक्टर के पास जाता है, डाक्टर जांच-पड़ताल करने के बाद तकलीफ का सही आकलन करने के लिए अल्ट्रासाउंड करने की सलाह देता है, मरीज जब अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए जाता है तो उसकी पर्ची पर तीन महीने बाद की तारीख देकर उसे वापस भेज दिया जाता है।

अब आप ही सोचिए कि जिस मरीज को तकलीफ आज है और उस तकलीफ का पता लगाने के लिए पांच महीने बाद अल्ट्रासाउंड किया जाए, तो उस मरीज पर क्या बीतेगी।

जिला के पांगी, भरमौर, तीसा, सलूणी और होली से मेडिकल कालेज चंबा आने वाले लोगों को अल्ट्रासाउंड करवाना काफी महंगा साबित हो रहा है। जैसे-तैसे कर मेडिकल कालेज चंबा पहुंचने पर उन्हें अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए तारीख पर तारीख मिल रही है। इससे सरकार की योजनाएं महज शगूफा ही साबित हो रही हैं। वहीं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी स्थिति अनुसार ही अल्ट्रासाउंड की तारीख देने की बात कह रहे हैं।

चंबा जिला की सवा छह लाख की आबादी स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए मेडिकल कालेज चंबा पर ही निर्भर है। मेडिकल कालेज चंबा के अलावा भरमौर, पांगी, तीसा, सलूणी और भटियात में सिविल अस्पताल हैं। किहार में नागरिक अस्पताल है। इसके अलावा जिले में दर्जनों प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। इन सिविल और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में गर्भवती महिलाओं को पेट दर्द और पथरी के मरीजों को जांच के लिए पहुंचने पर मेडिकल कालेज चंबा के लिए रेफर कर दिया जाता है। चंबा में अल्ट्रासाउंड की तारीख मिलने पर कमरे किराये पर लेकर निर्धारित तारीख तक का इंतजार करने के लिए उन्हें अतिरिक्त पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं।

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भरमौर, पांगी, चुराह, भटियात और डलहौजी में लाखों रुपये खर्चकर अल्ट्रासाउंड मशीनें तो अस्पतालों में स्थापित कर दी गई हैं लेकिन रेडियोलास्टि के पद खाली होने से ये मशीनें धूल फांक रही हैं। लोगों को मेडिकल कालेज में अल्ट्रासाउंड के लिए 270 रुपये चुकाने पड़ते हैं। निजी क्लीनिकों में प्रति अल्ट्रासाउंड 800 रुपये वसूले जाते हैं। ऐसे में 50 से लेकर 170 किलोमीटर का सफर तय कर पहुंचने वाली गर्भवती महिलाओं और अन्य मरीजों को अल्ट्रासाउंड करवाना महंगा साबित हो रहा है।

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इन मरीजों का दर्द सुनो

मुझे पेट संबंधी रोग है। चिकित्सक ने जांच कर अल्ट्रासाउंड करवाकर रिपोर्ट दिखाने की हिदायत दी है लेकिन अल्ट्रासाउंड नहीं हो पाया। अब मजबूरन निजी क्लीनिक का रुख करना पड़ रहा है।

-शिवानी, तीसा निवासी।

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सिविल अस्पताल तीसा में इलाज के बाद मुझे चंबा रेफर किया गया। यहां अल्ट्रासाउंड करवाने की जुलाई की तारीख मिली है। अब अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए मुझे तीन महीने का इंतजार करना पड़ेगा।

-गीता देवी, सनवाल निवासी।

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मेरे गुर्दे में पथरी है। तीन दिन पूर्व अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए मेडिकल कालेज आया लेकिन मुझे 20 दिन के बाद अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए डेट मिली है। इससे मेरी मुश्किलें बढ़ गई हैं।

-अजीत , कल्हेल निवासी

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मुझे दो साल से पित्त की थैली में पथरी है। मेडिकल कालेज में अल्ट्रासाउंड के लिए लंबी कतार में लगने के बाद शुक्रवार को चार माह बाद की तारीख मिली है। मै सलूणी से 65 किलोमीटर का सफर तय कर चंबा पहुंची हूं।

-सलूणी निवासी मीना

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अधिकारियों ने यह कहा

मेडिकल कालेज चंबा के एमएस डा. आदित्य कश्यप ने बताया कि मरीजों की स्थिति अनुसार ही उन्हें अल्ट्रासाउंड की तारीख दी जाती है। आपातकालीन स्थिति में मरीजों के तुरंत अल्ट्रासाउंड करवाने की व्यवस्था है।

चंबा मेडिकल कालेज के प्राचार्य डा. रमेश भारती ने बताया कि मेडिकल कालेज में रेडियोलाजिस्ट की कमी चल रही है। सरकार को इस संदर्भ में कई बार लिखा गया है। रिक्त पद भर दिए जाते हैं तो समस्या का समाधान हो जाएगा।

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