सवा करोड़ की निजी गाड़ियों और 55 लाख के होटलों के बिल भुगतान में ऊना प्रशासन की बड़ी धांधली : मुकेश अग्निहोत्री #news4
December 8th, 2021 | Post by :- | 168 Views

ऊना : कोरोना काल में जब मानवता रो रही थी तब ऊना जिला का प्रशासन दोनों हाथों से पैसा और संसाधन लूटने में लगा हुआ था। हालात यह है कि कोरोना काल में सरकारी गाड़ियों और सरकारी चालकों को प्रयोग में न लाकर प्राइवेट गाड़ियां हायर कर ली गईं और उनको सवा करोड़ रुपए का भुगतान किया गया जिसमें बड़ी धांधली को अंजाम दिया गया है। वहीं पूरे संसाधन होने के बावजूद होटल बुक किए गए और होटलों के नाम पर 55 लाख रुपए का भुगतान दर्शाया गया। यह सनसनीखेज आरोप नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने ऊना जिला मुख्यालय पर पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि जिला प्रशासन ने सरकारी गाड़ियां होते हुए भी निजी गाडिय़ां हायर कीं। यहां तक की एचआरटीसी का भारी भरकम बेड़ा था उसको भी दरकिनार कर दिया गया। जिला ऊना का प्रशासन कोरोना काल में प्राइवेट लिमिटेड फर्म की तरह काम करता रहा और खुली लूट की गई।

अग्निहोत्री ने आरोप लगाते हुए कहा कि निजी गाड़ियों को 1 करोड़ 24 लाख 76 हजार 283 रुपए का भुगतान किया गया है जबकि इसके लिए नियमानुसार न कोई टैंडर प्रक्रिया अपनाई गई और न कोई कोटेशन किसी से मंगवाई गई। कुल सवा करोड़ रुपए के भुगतान में से 41 लाख की गाडिय़ां ऐसी थीं जोकि प्रयोग में नहीं लाई गईं और उनको पेमेंट पूरी की गई। वहीं, दिन में एक घंटा गाड़ी का प्रयोग होने के बावजूद उनको 14 घंटे प्रयोग करने का भुगतान किया गया। न कोई मीटर रीडिंग दर्ज हुई और किसी प्रकार की लॉगबुक मैंटेन हुई। प्री-पेड टैक्सी होने के बावजूद भुगतान सीधे गाड़ी मालिकों को किया गया। इसके बिलों और रसीदों पर भी कांट छांट की गई है और अधिकतर पर फ्ल्यूड लगाकर धांधली को अंजाम दिया गया है। मुकेश ने कहा कि इसमें जो-जो शामिल रहा है और किसकी शह पर यह हुआ, उसको बख्शा नहीं जाएगा। कोई अगर गलतफहमी में है कि वह बच जाएगा तो वह अपनी गलतफहमी दूर कर ले।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकारी भवन और संसाधन होने के बावजूद इस अवधि में जिला ऊना के प्रशासन ने उनको प्रयोग में लाने की बजाए होटलों का इस्तेमाल किया। इस पर कुल 54 लाख 56 हजार के बिलों के भुगतान दर्शाए गए।लेकिन वहां पहचान किसी की नहीं है कि कौन वहां ठहरा था और किसके बिल अदा किए गए हैं। न होटल में ठहरने वाले का पता है कि कब ठहरा, कितने दिन ठहरा और कब उसने होटल छोड़ा लेकिन फिर भी उनके भुगतान किए गए। कागजों में हाईस्पीड डीजल डलवाना तो दर्शाया गया है लेकिन किस गाड़ी में डाला, कब डाला और कितना डाला यह नहीं दर्शाया गया है। न स्टॉक रजिस्टर, न एंट्री रजिस्टर और न किसी प्रकार की लॉग बुक मैंटेन है।

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