नेरवा में घर के बरामदे में चल रहा पशु औषधालय, पशुपालक पशुओं में फैल रहे लंपी वायरस से है परेशान #news4
September 15th, 2022 | Post by :- | 76 Views

नेरवा : उपमंडल चौपाल और नेरवा तहसील की अति दुर्गम पंचायत किरण के पशुपालक पशुओं में फैले लंपी वायरस से भयभीत हैं। किरण पंचायत की मनेवटी में एकमात्र पशु डिस्पेंसरी (औषधालय) में चिकित्सक, फार्मासिस्ट से लेकर एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी तक की तैनाती नहीं की गई है। इससे ग्रामीणों में अपने पशुओं में फैले संक्रमण को लेकर डर व समस्या कई गुना बढ़ गई है। यह औषधालय एक घर के बरामदे में चल रहा है। रविवार को ग्राम पंचायत किरण के पशुपालकों में उस समय हड़कंप मच गया था, जब उनके 35 पशु एक साथ लंपी वायरस संक्रमण से ग्रसित पाए गए।

हालांकि पशुपालन विभाग के चौपाल मंडल से एक टीम किरण पहुंच कर इन संक्रमित पशुओं की वैक्सीनेशन और उपचार कार्य में जुटी हुई है, परंतु डिस्पेंसरी में किसी भी कर्मचारी की नियुक्ति न होने से यहां के पशुपालकों में ¨चता और बढ़ गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि रविवार को उनके पशुओं में लंपी वायरस के लक्षण पाए जाने पर विभाग ने एक टीम को समय पर भेजकर उन्हें राहत तो दे दी है, परंतु यह स्थायी राहत नहीं है। किरण पंचायत के पशुपालकों ने सरकार के सामने गुहार लगाई है कि मनेवटी पशु डिस्पेंसरी में स्टाफ की नियुक्ति की जाए और इसका अपना भवन बनाया जाए। किरण पंचायत में पशु औषधालय में नहीं कोई कर्मचारी पंचायत निवासी शूरवीर, देबन ¨सह, सोहन ¨सह एवं सूरदास ने आरोप लगाया कि किरण में करीब तीन दशक पहले एक निजी घर के बरामदे में यह पशु डिस्पेंसरी खोली गई थी, परंतु यहां लगभग पांच साल से कोई भी अधिकारी व कर्मचारी, यहां तक कि एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भी नियुक्त नहीं है।

पशुओं का टीकाकरण करवाने और छोटे-छोटे उपचार के लिए उत्तराखंड के त्यूणी से निजी फर्म का फार्मासिस्ट बुलवाना पड़ता है। गुम्मा से भेजा है कर्मचारी को प्रतिनियुक्ति पर इस चिकित्सालय के लिए जिस कर्मचारी की गुम्मा से प्रतिनियुक्ति की गई है उसे पहले 24 किलोमीटर गुम्मा से उत्तराखंड के रिषाणु पहुंचना पड़ता है। इसके बाद यह कर्मचारी क्षेत्र के लिए कोई भी बस सेवा न होने के चलते करीब सात-आठ घंटे का पैदल सफर तय कर आठ किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई चढ़कर मनेवटी पहुंचता है।

ऐसे में यदि कोई पशु गंभीर रूप से बीमार हो जाए अथवा कोई भी आपात स्थिति होने पर ग्रामीणों के समक्ष भगवान भरोसे ही छोड़ देना एकमात्र विकल्प रह जाता है। करीब ढाई दशक पूर्व खोली गई इस डिस्पेंसरी के पास अपना भवन तो दूर इसके लिए जमीन तक भी नहीं है। थुंदल के चलौंथा में भी दिखे लक्षण किरण के बाद थुंदल पंचायत के चलौंथा गांव में भी पशुओं में लंपी वायरस के लक्षण दिख रहे हैं। पशु पालकों ने विभाग से अपील की है कि इलाज के लिए समय रहते कदम उठाएं।

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