हिमाचल में कोरोना के मुकाबले आया “भरो न” वायरस
February 29th, 2020 | Post by :- | 177 Views

भले ही दुनिया कोरोना वायरस से जूझ रही है,मगर हिमाचल की पॉलिटिक्स “भरो न” वायरस की चपेट में आ गई है। तीन मंत्रीपद खाली हैं। भाजपा कैडर के साथ अब जनता भी इनको भरने के लिए “भरो न” की मांग सरेआम करने शुरू हो गई है। आम भाषा में ही मौजूदा सियासी हालात की बात करें तो जो जनता मन्त्रिमण्डल में विस्तार या फेरबदल को लेकर चक्क दे फट्टे वाली फील रही थी,अब यह बोलने शुरू हो गई है कि सरकार ने तो फट्टे ही रख दिए।

मंत्रीपद लगातार खाली होते भी जा रहे हैं और किए भी जा रहे हैं । मगर इन “रिक्त स्थानों की पूर्ति” नहीं हो पा रही है। सवाल सरकार की उस इच्छा शक्ति पर उठ गया है,जिसमें जुबानी जोर तो खूब दिखता है मगर जमीनी कुछ भी नहीं। हैरानी की बात है कि अहम महकमे लगातार खाली होते जा रहे हैं। कांग्रेस के दौर में अफसरों का टोटा रहता था, अब भाजपा के दौर में मंत्रियों का टोटा हो गया है। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग किशन कपूर के दिल्ली निकलने से खाली हुआ था। ऊर्जा राज्य में अनिल शर्मा को हटाने के बाद आज तक कोई पॉवर हॉउस नुमा मंत्री नहीं मिला है।

विपन परमार के विधानसभा अध्यक्ष बनने के बाद से अब हेल्थ महकमा भी ग्लूकोज़ ड्रिप पर लग गया है। फिलवक्त कहीं कोई ऐसे आसार नहीं हैं कि प्रदेश को आगे ले जाने के लिए नए इंजिन सरकारी रेलगाड़ी से जोड़े जाएं। केंद्र और प्रदेश में भाजपा के डबल इंजनों के दावे भले ही हों,मगर महकमों के डिब्बे पहाड़ पर चढ़ नहीं पा रहे ।

दिल्ली में भाजपा को सबक सीखाने वाले सीएम अरविंद केजरीवाल को लेकर हिमाचल की जनता बातें करने शुरू हो गई है। आम जनता यह कह रही है कि दिल्ली में विकास के लिए केजरीवाल एक भी महकमा अपने पास नहीं रखा। जबकि हिमाचल में बंटे हुए मंत्रिपदों की भी वापसी होती जा रही है। वो तमाम महकमे खाली पड़े हैं,या फिर कर दिए गए हैं जो सीधे-सीधे जनता से जुड़े हुए हैं। मगर हाय री किस्मत, जनता को भूल सरकार अपनी सियासी जन्नत के प्रति ज्यादा गम्भीर है । जनता ने सरकार अपने लिए चुनी थी, पर मौजूदा हालात में सरकार खुद के लिए गम्भीर है और जनता के विकास की हालत गम्भीर होती जा रही है…

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