हमे कभी भी जीवन में अहंकार नहीं होना चाहिए : शास्त्री
November 2nd, 2019 | Post by :- | 259 Views
परागपुर। शिव जगन्नाथ मंदिर हार बाग पुली में श्री मद भागवत कथा के दूसरे दिन पंडित सुमित शास्त्री ने कथा वर्णन करते हुए कहा कि शुभ कर्म करते हुए कभी भी हमें अहंकार नहीं होना चाहिए। पांडवो ने जब राजसूय यज्ञ किया तो बड़े भाई धर्मराज युधिष्ठिर को यज्ञ करवाने का अहंकार हो गया तब भगवान श्रीकृष्ण ने नेवले का रुप बनाए हुए संत से धर्मराज युधिष्ठिर के अहंकार को तुड़वा दिया।
हमे कभी भी जीवन में अहंकार नहीं होना चाहिए।शास्त्री ने आगे बताया की भागवत की कथा कल्पवृक्ष के समान मनुष्यों के मनोरथों को पूर्ण करने वाली है। पापी हो या धर्मी ही सभी का उद्धार करती है, भागवत इसका श्रवण जीवन में शांति प्रदान करता है। और मन की शुद्धि सत्संग से बढ़कर साधन नहीं। सूर्य उदय और अस्त होता हुआ हमारी आयु को क्षीण करता है, पर जिसने भगवत कथा में एक क्षण भी व्यतीत कर लिया तो उसकी आयु व्यर्थ नष्ट नहीं होती। कथा के बीच सुन्दर भजन…जब कोई नहीं आता मेरे श्याम …. व मेरा छोटा सा संसार हरि आ जाओ एक बार.. ने आए हुए भक्तों को भाव विभोर कर दिया। कथा में आचार्य नीरज, अंकित, स्वर्णा, पवना, ऊषा, नितिन, शिखा वालिया, अमिता शर्मा, समग्ना,अनुपमा व सीमा ने भाग लिया।

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