आखिर कहाँ है चंडीगढ़ का सेक्टर 13
July 15th, 2019 | Post by :- | 1145 Views

बहुत से लोगों को आज भी इस बात का अंदाजा नहीं है कि चंडीगढ़ का सेक्टर 13 है भी । खुद चंडीगढ़ में रहने बाले शायद इस सेक्टर को कभी देख पाएं हों । बड़ी अजीब बात तो यह है कि जहां यह सेक्टर है, वहां की नई पीढ़ी को भी बहुत कम पता है कि इस सेक्टर के पीछे की कहानी क्या है । लेकिन हम आपको बता दें कि यह सेक्टर हिमाचल प्रदेश के लहौल स्पिती में स्थित है ,चंडीगढ़ से लगभग 540 किलोमीटर दूर। लेकिन इसका जवाब पाने के लिए हमें इतिहास में जाना पड़ेगा।

इतिहास के अनुसार तिब्बत को नेपाल से भी कई बार युद्ध करना पड़ा और नेपाल ने इसको हराया। नेपाल और तिब्बत की सन्धि के मुताबिक तिब्बत ने हर साल नेपाल को 5000 नेपाली रुपये हरज़ाना भरना होता था। इससे आजित होकर नेपाल से युद्ध करने के लिये चीन से सहायता माँगी। चीन की सहायता से उसने नेपाल से छुटकारा तो पाया लेकिन इसके बाद 1906-7 ई0 में तिब्बत पर चीन ने अपना अधिकार बनाया और याटुंग ग्याड्से एवं गरटोक में अपनी चौकियाँ स्थापित की। 1912 ई0 में चीन से मांछु शासन अंत होने के साथ तिब्बत ने अपने को पुन: स्वतंत्र राष्ट्र घोषित कर दिया। सन् 1913-14 में चीन, भारत एवं तिब्बत के प्रतिनिधियों की बैठक शिमला में हुई जिसमें इस विशाल पठारी राज्य को भी दो भागों में विभाजित कर दिया गया । लेकिन इतने बड़े भू-भाग को चीन छोड़ने के मूड में नहीं था और उसने दोबारा चीन पर अधिकार जता लिया. भूमिसुधार कानून एवं दलाई लामा के अधिकारों में हस्तक्षेप एवं कटौती होने के कारण, तिब्बत में चीन के विरुद्ध असंतोष की आग सुलगने लगी जो क्रमश: 1956 एवं 1959 ई0 में जोरों से भड़क उठी। परन्तु बलप्रयोग द्वारा चीन ने अब तिब्बत पर कब्ज़ा कर लिया था ।

उस समय भारत को महसूस हुआ कि हिमालय की तरफ से भी देश पर हमला हो सकता है और चीन एक दुश्मन देश के रूप में बेनकाब हुआ। तब देश को लगा कि हिमालय क्षेत्र में भी सेना के बेस बनाने होंगे। इसके लिए लाल बहादुर शास्त्री ने खुद जाकर सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा का जायजा लिया। ऐसे में हिमाचल प्रदेश के साथ तिब्बत सीमा पर भी सेना का बेस कैम्प बनाने की जरुरत महसूस हुई। क्योंकि पहले तिब्बत देश एक शांतिप्रिय देश था और उनके पास मात्र 700 सैनिक थे, इसलिए देश को उनसे किसी बात का डर नहीं था। लेकिन अब तिब्बत पर चीन का कब्ज़ा था और उनकी सेना भारत के अंदर घुसने को बेताब थीं।

ऐसे में हिमाचल प्रदेश के बर्फीले रेगिस्तान कहलाये जाने वाले किन्नौर और लाहौल स्पीति में भारत तिब्बत सीमा पुलिस के जवानों के बेस कैम्प बनाये जाने थे। इन क्षेत्रों में सपाट जमीन बहुत मुश्किल से मिलती है ऐसे में लेप्चा नामक एक गाँव को सेना का बेस बनाने के लिए चुना गया। लेकिन मुश्किल यह थी कि यहां के लोग अपनी जमीन छोड़कर कहीं जाना नहीं चाहते थे। दूसरी जगह तो सेना को खाली पहाड़ मिल गए लेकिन कौरिक में जहां सेना का कैम्प बनाया जाना था वहां गाँव थे, और लोग यहां से हटने को तैयार नहीं थे। उस समय चंडीगढ़ की रचना की जा रही थी ऐसे में गाँव के लोगों को लाल बहादुर शास्त्री ने चंडीगढ़ का एक सेक्टर देने का वायदा किया । यह था सेक्टर 13 जो आज भी खाली है। लाल बहादुर शास्त्री ने गाँव बालों को दूसरी जगह बसने के लिए राजी कर लिया लेकिन इस दौरान लाल बहादुर शास्त्री का देहांत हो गया ।

लाल बहादुर शास्त्री के निधन के उपरान्त देश कुछ अस्थिर चल रहा था ऐसे में इंदिरा गांधी ने कमान संभाली और इन क्षेत्रों का दौरा किया। स्थानीय लोगों को लाल बहादुर शास्त्री द्वारा किये वायदे के अनुसार , सरकार ने स्पीति नदी के किनारे बसे लेपचा को सेना पुलिस के लिए खाली करवा लिया। यहां के लोग अपनी मातृभूमि छोड़कर दूसरे शहर नहीं गए और यहीं आसपास बस गए। कुछ लोगों का यह भी कहना है कि नेता लोग सिर्फ गाँव खाली करवाने को आये उसके बाद किसी ने लोगों की सुध नहीं ली और ये लोग स्पीति नदी के पास ही बस गए। लाहौल स्पीति के ताबो और काजा के बौद्ध मठ के टेंरे गांवों के रास्ते पर सफेद रंग के बीच हरे रंग के का एक बड़ा सा क्षेत्र दिखाई देता है यही हिमाचल के चंडीगढ़ की निशानी है। यहां के लोग आलू और मटर उगाते हैं इसलिए जिस जगह ये फसल उगाते हैं वहां का क्षेत्र हराभरा रहता है, जबकि बाकी क्षेत्र सूखा रेगिस्तान सा लगता है।

इंदिरा गाँधी ने सीमा पर जाकर लोगों से वायदा तो किया कि जिस प्रकार लाल बहादुर शास्त्री ने उन्हें चंडीगढ़ में भी एक सेक्टर देने का वायदा किया है , उस वायदे को निभाया जायेगा । ऐसे में जब तक चंडीगढ़ नहीं बस जाता , तब तक लोगों को वहीँ कुछ किलोमीटर दूर बसा दिया गया… लोग वर्षों तक इन्तजार करते रहे , लेकिन उन अधूरे सपनो के न तो कभी कागज उन लोगों तक पहुंचे और न ही मुड़कर इंदिरा गाँधी वहां पहुंची । गुपचुप तरीके से लोगों को चंडीगढ़ का सेक्टर 13 देने का वायदा तो किया लेकिन बो वायदा अधूरा ही रहा । 13 सैक्टर का वायदा भी पूरा नहीं हुआ और 13 सैक्टर बनाया भी नहीं गया…

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर शहरी योजनाबद्धता और वास्तु-स्थापत्य के लिए प्रसिद्ध शहर चंडीगढ़ में एक कमी हमेशा से देखी गई है। यह शहर आधुनिक भारत का प्रथम योजनाबद्ध शहर है। चंडीगढ़ के मुख्य वास्तुकार फ्रांसीसी वास्तुकार ली कार्बूजियर हैं, लेकिन शहर में पियरे जिएन्नरेट, मैथ्यु नोविकी एवं अल्बर्ट मेयर के बहुत से अद्भुत वास्तु नमूने देखे जा सकते हैं। चंडीगढ़ का भारत के समृद्ध राज्यों और संघ शासित प्रदेशों की सूची में अग्रणी नाम आता है। भवन निर्माण कार्य हो, साफ सफाई हो या प्रति व्यक्ति आय चंडीगढ़ हमेशा बाजी मार जाता है। सबसे ख़ास बात कि दुनिया के आर्किटेक्ट्स के लिए मक्का कहा जाने वाला शहर चंडीगढ़ एक कमी के लिए हमेशा से जाना जाता रहा है। आखिर चंडीगढ़ का सेक्टर 13 कहां है इस बात की चर्चा गाहे-बगाहे होती रहती है। चंडीगढ़ में सभी सेक्टर बड़े ही सुसज्जित तरीके से सजाये गए हैं लेकिन सेक्टर 13 आखिर क्यों नहीं। इसके पीछे एक पश्चिमी देशों की एक धारणा भी मानी गई है। चंडीगढ़ के रचनाकार फ्रांसीसी वास्तुकार ली कार्बूजियर थे, लेकिन पश्चिमी देशों में 13 अंक को वास्तु के हिसाब से सही नहीं माना जाता। साफ-साफ कहें तो पश्चिमी देशों में 13 नंबर को हानिकारक मानते हैं ऐसे में वास्तुकार ली कार्बूजियर ने इस नंबर के सेक्टर को ही चंडीगढ़ में जगह नहीं दी। वास्तुकारों की महान कला साफ सफाई से लेकर प्राकृतिक सुंदरता सब कुछ चंडीगढ़ में एक लड़ी की तरह पिरोई हुई है।


प्रति व्यक्ति आय में भी शहर देश में उच्च स्थान रखता है और शिक्षा के क्षेत्र में भी यहां के लोग किसी से पीछे नहीं हैं। लेकिन इतना सब होने के बाद भी आखिर यहां के लोग या वास्तुकार ली कार्बूजियर 13 नंबर के इतना हानिकारक मानते थे इस पर भी बहस छिड़ी हुई है। बहस हो पहाड़ के लोगों से किया मजाक, लेकिन ऊंचे पहाड़ों तले किए वायदे, नेताओं के देहांत के साथ ही दम तोड़ गए..

यहां के लोग बताते हैं कि जिस प्रकार उन्हें अधूरे सपने दिखाए गए उसी तरह उनके बिना चंडीगढ़ भी अधूरा रहेगा। उसके बाद न तो उन लोगों को चंडीगढ़ में बसाया गया , और न ही चंडीगढ़ में सेक्टर 13 बनाया गया । स्थानीय लोग तत्कालीन सरकार द्वारा दिखाए गए अधूरे सपने के याद करते हुए अपने इस क्षेत्र को चंडीगढ़ का सेक्टर 13 भी बुलाते हैं।
जितेन ठाकुर..

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