क्यों ज़िंदगी में महत्वाकांक्षा भी बहुत ज़रूरी है? #news4
January 7th, 2022 | Post by :- | 169 Views

महत्वाकांक्षा को हमारी दुनिया में एक बहुत ही बुरे शब्द के रूप में जाना जाता है. हमारी कंडिशनिंग कुछ इस तरह हुई है कि हमारी कहानियों तक में महत्वाकांक्षी व्यक्ति को हमेशा से नकारात्मक व्यक्ति या विलेन के रूप में देखा जाता है. चलिए अब तो करियर के मामले में महत्वाकांक्षी होने को थोड़ी-बहुत मान्यता मिल गई है, पर पर्सनल लाइफ़ में अब भी यह एक नकारात्मक शब्द है. जबकि अगर प्रैक्टिकल होकर देखा जाए तो महत्वाकांक्षा अच्छी ज़िंदगी जीने के लिए बहुत ही ज़रूरी तत्व है. प्रोफ़ेशनल और पर्सनल दोनों ही जगहों पर यह सफलता दिलाता है. चलिए हम महत्वाकांक्षा को एक नए चश्मे से देखते हैं और यह पता लगाते हैं कि क्या होगा यदि हममें महत्वाकांक्षा नहीं होगी, ताकि आपको इसकी अहमियत का अंदाज़ा हो जाए.

हमारी प्राथमिकताएं तय नहीं हो पातीं
अगर हममें महत्वाकांक्षा यानी ज़िंदगी में कुछ हासिल करने की प्रबल इच्छा नहीं होती है तो पूरी ज़िंदगी गुज़ार देने के बाद हम पाते हैं कि हमने कुछ किया ही नहीं. यदि पति-पत्नी में से एक महत्वाकांक्षी हो और दूसरा बिना किसी लक्ष्य के हो तो एक समय बाद दोनों एक-दूसरे को खटकने लगते हैं. जहां महत्वकांक्षी पार्टनर को लगने लगता है कि मेरा पार्टनर अपनी स्थिति में सुधार नहीं चाहता, वहीं बिना महत्वाकांक्षा वाले पार्टनर को लगने लगता है कि मेरे साथी को पर्सनल लाइफ़ से कुछ पड़ी ही नहीं है. इसलिए महत्वाकांक्षा हो न हो, पर अपनी प्राथमिकताएं तय होनी चाहिए. यानी आप ज़िंदगी से क्या चाहते हैं यह तय करें और उसके अनुसार अपने क़दम बढ़ाएं.

हम रोज़मर्रा के कामों में उलझकर रह जाते हैं 
हर कोई चाहता है कि उसकी ज़िंदगी में बदलाव हो. उसका आनेवाला कल, मौजूदा समय से बेहतर हो. पर ऐसा सिर्फ़ सोचने से होनेवाला नहीं है. इसके लिए आपको काम करना पड़ेगा. अगर आप अपनी ज़िंदगी को अलग बनाना चाहते हैं तो आपको रोज़मर्रा के कामों से कुछ अलग हटकर करना होगा. अगर आपमें महत्वाकांक्षा नहीं होगी तो आप अपनी मौजूदा ज़िंदगी और लाइफ़स्टाइल को कम्फ़र्ट ज़ोन बना लेंगे और कुछ नया करने की सोचेंगे भी नहीं. इससे होगा क्या, आपकी ज़िंदगी कल भी वहीं रहेगी, जहां आज है. जबकि एक दिन आप पाएंगे कि दुनिया तो काफ़ी बदल गई है. यह तो हुई प्रोफ़ेशनल लाइफ़ की बात. पर्सनल लाइफ़ में जब हमारी महत्वाकांक्षा ख़त्म हो जाती है तब हम अपने पार्टनर को रिझाना या उसके लिए कुछ नया करना बंद कर देते हैं और हमारी ज़िंदगी बोरिंग हो जाती है.

पर्सनल लाइफ़ में झगड़े होने शुरू हो जाते हैं 
अगर आप दोनों के जीवन से जुड़े लक्ष्य और उसे हासिल करने के रोड मैप में बहुत ज़्यादा फ़र्क़ है तो आपकी शादीशुदा ज़िंदगी पर इसका बुरा असर पड़ना शुरू हो जाएगा. पहले-पहल तो आपके बीच में अनबन होगी, फिर समय बीतने के साथ झगड़े और उसके बाद बड़े झगड़े कॉमन हो जाएंगे. आप पाएंगे कि आप दोनों कई बातों पर एकमत नहीं होते. जो चीज़ें आपको ज़रूरी लगती हैं, हो सकता है कि पार्टनर को ग़ैरज़रूरी लगें. छोटी-छोटी बातों पर होनेवाली लड़ाइयां अलगाव का भी कारण बन सकती हैं. वहीं अगर आप दोनों की अपनी-अपनी महत्वाकांक्षाएं होंगी तो आपका ध्यान उसे पूरा करने पर होगा. एक-दूसरे को करियर में आगे बढ़ता देख दोनों को अच्छा लगेगा. आप एक-दूसरे की मदद भी कर सकते हैं.

आप कुछ अच्छा करने के लिए प्रेरित नहीं हो पाते 
अगर आप किसी ऐसे व्यक्ति के साथ रहते हैं, जो उत्साह से भरा है तो कुछ समय बाद आप भी ख़ुद को एनर्जेटिक पाएंगे. पर यदि आपका साथी अपनी ही खोल में रहनेवाला कुएं का मेंढक है तो कुछ समय बाद या तो आप उसी की तरह हो जाएंगे या उससे पूरी तरह से दूर हो जाएंगे. हममें उत्साह तब होता है, जब कुछ करने की इच्छा होती है. इसी को दूसरी भाषा में एम्बिशन यानी महत्वाकांक्षा कहा जाता है.
उम्मीद है आप समझ गए होंगे कि महत्वाकांक्षा का होना उतना बुरा नहीं है, जितना उसका न होना. तो साथ ही साथ आप महत्वाकांक्षा को ख़राब शब्दों की सूची से निकालकर सकारात्मक शब्दों की सूची में डाल लीजिए. और सोचिए आपको ज़िंदगी में क्या करना है और आप उसे कैसे कर पाएंगे.

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