Chakki Bridge को बचाने आखिर क्‍यों उतरी सेना, क्‍यों महत्‍वपूर्ण है हिमाचल व पंजाब को जोड़ने वाला यह पुल, जानिए सबकुछ #news4
August 27th, 2022 | Post by :- | 105 Views

नूरपुर : हिमाचल और पंजाब को जोड़ने वाले 500 मीटर लंबे चक्‍की पुल को सुरक्षित करने के लिए एनएचएआइ के साथ सेना भी उतर आई है। सामरिक दृष्टि से यह पुल बेहद महत्‍वपूर्ण है। हिमाचल और पंजाब को जोड़ने के सा‍थ यह पुल सेना को सरहद तक भी पहुंचाता है। पठानकोट-मंडी एनएच पर बने इस पुल से होकर ही सेना की कानवाही लेह लद्दाख तक पहुंचती है। सेना को अगर लेह में सामग्री ले जानी हो तो सेना का पूरा कारवां पठानकोट होकर चक्की पुल से जाता है। इसके अलावा मनाली के लिए भी सेना की सामग्री भी यहीं से होकर जाती है।

खनन का दंश झलकर और बारिश की भेंट चढ़कर अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा राष्ट्रीय राजमार्ग पठानकोट-मंडी का चक्की पुल का जीवन अभी ओर कितना होगा, इसको लेकर अभी तक कुछ भी स्पष्ट नहीं हो रहा पा रहा है। चक्की पुल के अस्तित्व को बचाने के लिए एनएचएआई ने प्रयास तेज कर दिए हैं। नेशनल हाईवे अथारिटी आफ इंडिया के अलावा सेना भी इस पुल को बचाने में जुटी हुई है।

शुक्रवार को एनएचएआइ के क्षेत्रीय अधिकारी अब्दुल बासित व अन्य अधिकारी भी मौजूद थे और पुल की स्थिति का जायजा लिया। शनिवार को सुबह होते ही सेना व एनएचएआइ की टीम जुट गई है। सेना की टीम भी पुल को बचाने के दिन रात एक कर रही हैं। पुल को बचाने के लिए पानी के बहाव का मोड़ना सबसे ज्यादा जरूरी है, ताकि पुल का बचाव किया जा सके।

पानी का बहाव मोड़ने के लिए पिछले कल से एनएचएआई के साथ-साथ आर्मी के जवान भी डटे हुए हैं। अभी एनएचएआइ और सेना की प्राथमिकत पानी को डायवर्ट करना है तभी पुल सुरक्षित बच सकता है। शुक्रवार तक काफी हद तक सेना की टीम पानी को डायवर्ट करने में सफल होती दिख रही थी, लेकिन अचानक फिर से पानी पुरानी ही दिशा की ओर ढल गया। इसका कारण ये रहा कि शुक्रवार दोपहर बाद एकाएक चक्की का जलस्तर बढ़ गया। जलस्तर बढ़ने से पानी डायवर्ट करने के लिए बनाया तट क्षतिग्रस्त हो गया जिससे पानी एक बार फिर उसी ओर बढ़ गया।

अभी खड्ड में होगा क्रेट लगाने का काम

जो दो पिलर खतरे में हैं, वहां का पानी जैसे ही डायवर्ट हो जाता है तो एनएचएआइ और सेना की टीमें खड्ड के बहाव काे स्थायी तौर पर बदलने के लिए क्रेट लगाएंगी। क्रेट लगने के बाद प्रभावित पिलरों की ओर पानी का बहाव आने की उम्मीद कम हो जाएगी। क्रेट लगाने में अभी कम से कम 10 से 15 दिन बड़े आराम से लग जाएंगे।

12 साल में ही क्षतिग्रस्‍त हो गया करोड़ों का पुल

वर्ष 2010 में ही चक्की का नया पुल बनाया गया था। इससे पूर्व यहां छोटा पुल था, जोकि दशकों पुराना था। बड़ी बात ये है कि जब तक वो पुराना पुल था तो हिमाचल व पंजाब दोनों राज्यों की पुलिस जवान पुल के दोनों ओर तैनात रहते थे। नया पुल बन जाने के बाद यहां से पुलिस जवान हटा लिए गए। पुलिस जवानों की हटते ही खनन माफिया को यहां दशकों से सुरक्षित खनन सामग्री का खजाना मिल गया। खनन के कारण ही चक्की पुल क्षतिग्रस्त हुआ है।

पुल के दो पिलर हैं खतरे में

चक्की सड़क पुल के दो पिलर पी-1 व पी -2 पानी के बहाव के करण खतरे में हैं और भूमि कटाव के कारण पुल गिरने का खतरा बढ़ गया है और इस पुल को दूसरी बार बुधवार रात को ट्रैफिक के लिए बंद किया हुआ है। जिससे लोगों को मुशिकलें आ रही हैं। चक्की पुल पर यातायात बंद करके सारा ट्रैफिक कंडवाल- भदरोआ- पठानकोट मार्ग पर शिफ्ट कर दिया गया है। चक्की पुल पर अभी यातायात बहाल होने की कोई उम्मीद नहीं है तथा न ही एनएचएआइ कोई जोखिम उठाना चाहता है।

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