ऊना, हमीरपुर, बिलासपुर में घरों से क्यों निकल रहा पानी … #news4
March 19th, 2022 | Post by :- | 376 Views

ऊना, हमीरपुर, बिलासपुर में घरों से क्यों निकल रहा पानी

हिमाचल प्रदेश में जगह जगह दीवारों और फर्स पर पानी आने का सिलसिला जारी है। यह वास्तव में संघनन है। प्रदेश में सुबह शाम को ठंड है जबकि दिन का तापमान एकदम से बहुत बढ़ जा रहा है, यह उसी का परिणाम है।

वास्तव में कुछ समय के लिए बाहर का तापमान बढ़ रहा है, जबकि घर के अंदर का तापमान उससे अलग है । सीधे शब्दों में कहें तो अधिकतम और न्यूनतम तापमान के बीच लगभग 10/12 डिग्री का अंतर रहता है। मगर आजकल निचले हिमाचल में अचानक यह अमतर 17/18 डिग्री तक पहुंच गया है, यह इसी का परिणाम है

संघनन कब होता है? (when does condensation happen )Eyewitness News Himachal
जब नमी सहित हवा ठंडा होने लगता है, तब एक ऐसा समय आता है जब हवा द्वारा पानी के भाप को धारण किए रहने की क्षमता ख़त्म होने लगती है।

इस समय संतुष्टि बिंदु (saturation point) सापेक्षिक आर्द्रता (relative humidity) के मुकाबले 100% रहता है एवं ओशांक (dew point) पर पहुँच जाता है।

तब अधिक मात्रा में पाया जाने वाला भाप द्रव्य रूप में संघनित हो जाता है। अगर यह सीधे ठोस रूप में बदल जाता है, तो उस प्रक्रिया को ऊध्र्वपातक (sublimation) कहते हैं।

खुली हवा में जब बहुत छोटे छोटे कण संघनन के कारण ठन्डे हो रहे होते हैं, उन कणों को हाईग्रोस्कॉपिक संघनन नुक्लिआइ (nuclei) कहा जाता है। धूल,राख, समुद्री नमक आदि कुछ nuclei हैं जो पानी को आसानी से सोख पाते हैं।

जब नमी सहित हवा किसी ठन्डे वस्तु के संपर्क में आता है या जब तापमान ओशांक (dew point) के बराबर होता है, तब भी संघनन प्रक्रिया होती है। ठण्ड होने का परिमाण एवं सापेक्षिक आर्द्रता – यह दो कारक हैं जिनपर संघनन निर्भर करता है।

संघनन की प्रक्रिया (process of condensation )Eyewitness News Himachal
निम्नलिखित अवस्थाओं में संघनन प्रक्रिया होती है:

जब हवा का तापमान ओशांक पर पहुँच जाता है, इस परिस्थिति में आयतन सतत या स्थिर (constant) रहता है।
जब पानी का आयतन एवं तापमान दोनों कम हो जाता है।
वाष्पीकरण के दौरान जब हवा में नमी की मात्रा बढ़नी शुरू होती है।
संघनन प्रक्रिया होने के बाद वायुमंडल में मौजूद पानी के भाप या नमी इनमे से किसी एक का रूप ले लेते हैं – ओस, धुंध, बादल, बर्फ के टुकड़े।

संघनन के निर्माण हेतु शीतलन प्रक्रिया (Cooling Process to produce Condensation )Eyewitness News Himachal
इस प्रक्रिया को दो भागों में विभाजित किया गया है:

स्थिरोष्म तापमान बदलाव (Adiabatic Temperature Changes in Hindi)
जब हवा की गति तेज होती है, तो यह फैलता है। प्रति यूनिट आयतन जो ऊष्मा की मात्रा रहती है, वह कम हो जाती है, जिससे तापमान भी कम हो जाता है।

इस प्रकार का तापमान बदलाव जिसमे उष्मा की मात्रा में कोई कमी नहीं होती, उठाव (ascent) एवं विस्तार के द्वारा ही हवा ठंडा हो जाता है, उसको स्थिरोष्म बदलाव कहते हैं।

हवा के ऊर्ध्वधर विस्थापन के कारण स्थिरोष्म एवं निम्नगामी वायुजनित (katabatic) तापमान बदलाव होते हैं।

ठण्डा एवं तेज हवा जो नीचे की तरफ बह रहा हो, वह निम्नगामी वायुजनित उदहारण हैं।

गैर स्थिरोष्म तापमान बदलाव (Non-Adiabatic Temperature Changes )Eyewitness News Himachal
विकिरण (radiation), प्रवाहकत्व (conduction), या ठन्डे हवा के साथ मिश्रण के दौरान गैर स्थिरोष्म प्रक्रिया होती है।

विकिरण के कारण जब ऊष्मा की मात्रा में कमी आती है, तब हवा ठंडा हो जाता है। हाईग्रोस्कोपिक nuclei के हवा में होने के कारण नमी सहित हवा सीधे विकिरित (radiate) होती है, फिर शीतलन (cooling) के कारण धुंध या बादल का निर्माण होता है।

वातावरण परिस्थतियों के आधार पर ठन्डे सतह के संपर्क में आने पर भी ओस, बर्फ के कण या धुंध का निर्माण होता है।

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