सत्संग का असर क्यों नहीं होता ?
June 13th, 2019 | Post by :- | 256 Views

शिष्य गुरु के पास आकर बोला, गुरु जी हमेशा लोग प्रश्न करते हैं कि सत्संग का असर क्यों नहीं होता?
मेरे मन में भी यह प्रश्न चक्कर लगा रहा है।
गुरु समयज्ञ थे,
बोले- वत्स! जाओ, एक घड़ा मदिरा ले आओ।
शिष्य मदिरा का नाम सुनते ही अवाक रह गया।
गुरू और शराब!
वह सोचता ही रह गया।
गुरू ने कहा सोंचते क्या हो? जाओ एक घड़ा मदिरा ले आओ। वह गया और एक छला छल भरा मदिरा का घड़ा ले आया।
गुरु के समक्ष रख बोला-
“आज्ञा का पालन कर लिया”
गुरु बोले –
“यह सारी मदिरा पी लो” ।
शिष्य अचंभित!!
गुरुने कहा,
शिष्य! एक बात का ध्यान रखना, पीना पर शीघ्र कुल्ला थूक देना, गले के नीचे मत उतारना।
शिष्य ने वही किया,
शराब मुंह में भरकर तत्काल थूक देता, देखते देखते पूरा घड़ा खाली हो गया।
आकर कहा- “गुरुदेव घड़ा खाली हो गया”,
“तुझे नशा आया या नहीं?”
पूछा गुरु ने?
गुरुदेव! नशा तो बिल्कुल नहीं आया।
∆अरे मदिरा का पूरा घड़ा खाली कर गये और नशा नहीं चढा?
∆गुरुदेव नशा तो तब आता जब मदिरा गले से नीचे उतरती, गले के नीचे तो एक बूंद भी नहीं गई फ़िर नशा कैसे चढ़ता।
∆बस फिर सत्संग को भी उपर उपर से जान लेते हो, सुन लेते हो गले के नीचे तो उतरता ही नहीं, व्यवहार में आता नहीं तो प्रभाव कैसे पड़े।
∆गुरु के वचन को केवल कानों से नही, मन की गहराई से सुनना, एक-एक वचन को ह्रदय में उतारना और उस पर आचरण करना ही गुरु के वचनों का सम्मान है ।
*पांच पहर धंधा किया*,
*तीन पहर गए सोए*
*एक घड़ी ना सत्संग किया*,
*तो मुक्ति कहाँ से होए*।।

Jai sachidanand ji🙏🏻

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