हिन्दू धर्म में क्यों की जाती है वृक्ष की पूजा? #news4
June 1st, 2022 | Post by :- | 238 Views
5 June Environment Day : एकेश्वरवादी धर्म के लोगों को लिए यह बात बड़ी अजीब लगती है कि हिन्दू धर्म के लोग वृक्ष की पूजा क्यों करते हैं (Worship of Nature in Hinduism) जबकि वह कोई ईश्‍वर या भगवान नहीं है? दरअसल, हिन्दुइज्म यह मानता है कि इस ब्रह्मांड में सभी कुछ परमात्मा का ही अंश है और सभी एक दूसरे से आंतरिक रूप से जुड़े हुए हैं।
पीपल और बरगद : वृक्ष की पूजा या प्रकृति की पूजा करने के पीछे साइंटिफिक रीजन भी है। जैसे कि हिन्दू धर्म में बरगद और पीपल के पेड़ की पूजा का प्रचलन है। हम सभी जानते हैं कि यह वृक्ष 24 घंटे ऑक्सीजन देते हैं। अथर्ववेद के उपवेद आयुर्वेद में पीपल और बरगद के औषधीय गुणों का अनेक असाध्य रोगों में उपयोग वर्णित है। औषधीय गुणों के कारण ही इन्हें ‘कल्पवृक्ष’ की संज्ञा दी गई है। यानी की हमारे ऋषि मुनि कहीं न कहीं इस वृक्ष के महत्व को समझते थे।
अक्सर आपने देखा होगा की पीपल और वट वृक्ष की परिक्रमा का विधान है। इनकी पूजा के भी कई कारण है। स्कन्द पुराण में वर्णित पीपल के वृक्ष में सभी देवताओं का वास है। पीपल की छाया में ऑक्सीजन से भरपूर आरोग्यवर्धक वातावरण निर्मित होता है। इस वातावरण से वात, पित्त और कफ का शमन-नियमन होता है तथा तीनों स्थितियों का संतुलन भी बना रहता है। इससे मानसिक शांति भी प्राप्त होती है। पीपल की पूजा का प्रचलन प्राचीन काल से ही रहा है। इसके कई पुरातात्विक प्रमाण भी है।
अश्वत्थोपनयन व्रत के संदर्भ में महर्षि शौनक कहते हैं कि मंगल मुहूर्त में पीपल वृक्ष की नित्य तीन बार परिक्रमा करने और जल चढ़ाने पर दरिद्रता, दु:ख और दुर्भाग्य का विनाश होता है। पीपल के दर्शन-पूजन से दीर्घायु तथा समृद्धि प्राप्त होती है। अश्वत्थ व्रत अनुष्ठान से कन्या अखण्ड सौभाग्य पाती है।
तुलसी और आंवला : इसी तरह यदि हम औष‍धीय पौधों की बात करें तो तुलसी और आंवला की भी पूजा होती है। कोविड 19 के समय जब विटमिन सी को अच्‍छे से लेने की सलाह दी गई तब हम सब ने आमला का सेवन और शुरु कर दिया था। इसी तरह जब इम्यूनिटी को बूस्ट करने की बात की गई तो सभी ने तुलसी का रस पीना प्रारंभ कर दिया था। यह दोनों ही तरह के पौधे अत्यंत ही औषधीय गुणों से संपन्न है। यह कई तरह के रोगों को खत्म करने की क्षमता रखते हैं। आयुर्वेद में आमला को सूपरफूड कहा गया है और तुलसी को अमृत माना है।
वन संपदा पूजनीय है : वृक्षों, पौधों, लताओं आदि वनस्पतियों से हमें फल, फूल, सब्जी, कंद-मूल, औषधियाँ, जड़ी-बूटी, मसाले, अनाज आदि सभी तो प्राप्त होते ही हैं साथ ही उक्त सभी वनस्पतियाँ हमारी जलवायु और पर्यावरण का संतुलन बनाए रखकर वर्षा, नदी, पहाड़ और समुद्र का संरक्षण भी करती है। इन्हीं से जलचर, थलचर और नभचर प्राणियों का जीवन भी चलता रहता है, इसीलिए हिंदू धर्म में वन की संपदाओं को संवृक्षित रखने के लिए सभी तरह के उपाय बताए गए हैं। वन की संपदाएँ हिंदू धर्म के लिए पूजनीय है। किंतु आज का मानव वन को नष्ट करने में लगा है तो सोचे मानव भी कब तक बचा रह सकता है?
प्रकृति को दें धन्यवाद : हिंदू धर्म में प्रकृति के सभी तत्वों की पूजा और प्रार्थना का प्रचलन और महत्व है, क्योंकि हिंदू धर्म मानता हैं कि प्रकृति से हमें बहुत कुछ प्राप्त होता है। इसीलि पूजा के माध्यम से हम उन्हें आभार व्यक्त करते हैं। प्रृति ही ईश्वर की पहली प्रतिनिधि है। प्रकृति के सारे तत्व ईश्वर के होने की सूचना देते हैं। इसीलिए प्रकृति को देवता, भगवान और पितृ माना गया है।
ये पेड़ जरूर लगाएं : शास्त्रों के अनुसार जो व्यक्ति एक पीपल, एक नीम, दस इमली, तीन कैथ, तीन बेल, तीन आँवला और पाँच आम के वृक्ष लगाता है, वह पुण्यात्मा होता है और कभी नरक के दर्शन नहीं करता। इसी तरह धर्म शास्त्रों में सभी तरह से वृक्ष सहित प्रकृति के सभी तत्वों के महत्व की विवेचना की गई है।

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