तीर्थन घाटी ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क शाईरोपा में धूमधाम से मनाया गया वन्य प्राणी सप्ताह और महिला मेला। .. #news4
October 3rd, 2022 | Post by :- | 261 Views

तीर्थन घाटी ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क शाईरोपा में धूमधाम से मनाया गया वन्य प्राणी सप्ताह और महिला मेला।

महिलाओं की नाटी, कुर्सी दौड़ और प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता रही मुख्य आकर्षण।

कार्यक्रम के माध्यम से लोगों को मनोरंजन के साथ स्वच्छता, पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण का दिया सन्देश।

मां बूंगा स्वयं सहायता समूह मगडूल को नाटी में मिला प्रथम पुरस्कार, गांव वन विकास कमेटी मनाहरा रही दुसरे स्थान पर।

विश्व धरोहर स्थल का सरंक्षण एवं संवर्धन करके आने वाली पीढ़ियों के लिए संजोए रखना जरूरी- निशांत मंधोत्राा.

तीर्थन घाटी गुशैनी बंजार (परस राम भारती):- जिला कुल्लू में उपमंडल बंजार की तीर्थन घाटी अपनी प्राकृतिक सुन्दरता के साथ यहां की प्राचीनतम सभ्यता और संस्कृति के लिए भी जानी जाती है। इस घाटी में स्थित ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क को वर्ष 2014 में विश्व धरोहर का दर्जा मिला है। पार्क क्षेत्र के सरंक्षण एवं संवर्धन के लिए पार्क प्रबन्धन द्वारा हर वर्ष 2 अक्टूबर के दिन को एक उत्सव के रुप में मनाया जाता है। हर वर्ष की भांति इस बार भी पार्क प्रबन्धन द्वारा शाईरोप में वन्य प्राणी सप्ताह और महिला मेले को बड़ी धुमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर यहां की स्थानीय महिलाओं के लिए कुल्लूवी नाटी प्रतिस्पर्धा के आलावा, कुर्सी दौड़ और प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जो इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहा।

इस अवसर पर ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क के वन मण्डल अधिकारी शमशी निशांत मांधोत्रा, एसीफ मुनीश रांगड़ा, वन परिक्षेत्राधिकारी तीर्थन परमानंद, वन विभाग वन्य प्राणी विंग के अन्य कर्मचारीगण, स्थानीय जनप्रतिनिधि, वन विभाग से सेवानिवृत अधिकारीगण, स्वैच्छिक संस्थाओं के सदस्य एवं पदाधिकारी और अन्य गणमान्य व्यक्ति विषेश रूप से उपास्थित रहे।

वन मण्डल अधिकारी निशांत मंधोत्रा ने कहा है कि विश्वभर में हर साल अक्टूबर माह के पहले सप्ताह को वन्य प्राणी सप्ताह के रूप में मनाया जाता है। इन्होंने बताया कि इस दिवस को मनाने का मुख्य उद्देश्य दुनिया भर में तेजी से विलुप्त हो रही वनस्पति और वन्य जीव जंतुओं की प्रजाति की सुरक्षा के प्रति लोगों में जागरूकता पैदा करना है।करीब 20 वर्ष पूर्व से ही गांधी जयंती के अवसर पर यह उत्सव मनाया जाता आ रहा है। विश्व धरोहर स्थल का दर्जा मिलने के पश्चात इस दिन को महिला मेले के रुप में मनाया जा रहा है। अब यह मेला घाटी की महिलाओं के लिए मनोरंजन के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने और अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने का भी बेहतर जरिया बन गया है। इन्होंने कहा कि अबकी बार इस मेले में एक ओर जहां महिला लोकनृत्य प्रतिस्पर्धा आयोजित की गई वही स्कूली छात्र छात्राओं के लिए भी प्रश्नोत्तरी और पेंटिंग प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया है।

इस बार कुल्लुवी नाटी प्रतिस्पर्धा में तीर्थन, बंजार और सैंज क्षेत्र से कुल 21 महिला मंडलों और स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने हिस्सा लिया है। इस एक दिवसीय महिला नाटी प्रतियोगिता में मां बूँगा स्वयं सहायता समूह मगडूल को प्रथम, गांव वन विकास कमेटी मनाहरा को द्वितीय और चांदनी महिला मंडल बलागाड़ को तृतीय पुरस्कार हासिल हुए है।

इस प्रतियोगिता में विजेता टीमों के अलावा हंसपुरी महिला मंडल धारा शलींगा, जागृति महिला मंडल रीखली, तीर्थन वैली महिला मंडल खोडू पुलंगा नाही, गांव वन विकास कमेटी पेखड़ी, महिला मंडल नागनी धारागाड, देवता बनशीरा स्वयं सहायता समूह कंडीधार, नारी शक्ति महिला मंडल मथेना, देवता थान स्वयं सहायता समूह तुंघ, जय दुर्गा माता महिला मंडल शुकारी, जैहर स्वयं सहायता समूह जिल्ली नही, देवता पांच बीर स्वयं सहायता समूह करटाह, लक्ष्मी नारायण स्वयं सहायता समूह रोपा, सत्यम शिवम सुंदरम सुचैहन रोपा, लक्ष्मी महिला मंडल दाडी, महिला मंडल बागीशड़ी, नारी शक्ति स्वयं सहायता समूह शांघड की महिलाओं ने इस कुल्लवी नाटी प्रतिस्पर्धा में अपने पारम्परिक परिधानों के साथ बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया और अपनी अपनी कला का प्रर्दशन किया है। सभी महिलाओं ने मंनोरंजन के साथ साथ मुख्यता बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, स्वच्छता, पर्यावरण, वनों और वन्य जीवों के संरक्षण का सन्देश दिया है।

गौरतलब है कि ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क इकोजोन में स्थित स्थानीय ग्राम पंचायतों की अधिकतर महिला मंडलों ने इस कार्यक्रम से दूरी बनाए रखी। इस कार्यक्रम में भाग लेने वाली तीर्थन घाटी की चार महिला मंडलों के अलावा सभी ग्रुप बंजार और सैंज क्षेत्र से आए थे। स्थानीय लोगों को वन विभाग से शिकायत है कि पार्क क्षेत्र के अन्दर उनके पारंपरिक हक हकूकों को खत्म करने की कोशिश की जा रही है। क्योंकि पार्क प्रबंधन द्वारा वन अधिकार कानून 2006 को यहां के स्थानीय लोगों के लिए लागू करवाने में अड़चने पैदा की जा रही है। लोगों के सामुदायिक दावों की फाइलों पर आपत्तियां लगाई गई है इसलिए स्थानीय महिला मंडलों ने इस कार्यक्रम के बहिष्कार का फैसला लिया था।

वन मण्डल अधिकारी निशांत मंधोत्रा का कहना है कि वन अधिकार कानून को धरातल स्तर पर लागू करवाने का जिम्मा राजस्व विभाग का है। हमने कागजी प्रक्रिया को पुरा करने के लिए कुछ साक्ष्य मांगे हैं जिसके बाद दावा फाइलों पर लगी अपातिया हट जाएगी। इन्होने कहा है कि स्थानीय लोगों के पवित्र देव स्थलों पर जाने के अधिकार यथावत बहाल रहेंगे। इस सन्दर्भ में स्थानीय हितधारकों के साथ शीघ्र ही एक बैठक का आयोजन किया जाएगा।

स्कूली छात्र छात्राओं के लिए करवाई गई प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय गुशैनी की छात्रा प्रीतिका, कंचन, तमना जुफरा को प्रथम, राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बठाहड़ के सोनू, अंकित, रितिक ठाकुर को द्वितीय तथा राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बंजार की सेजल सूद, प्रियंका पाठक और तमन्ना को तृतीय पुरस्कार हासिल हुआ है। वहीं कुर्सी दौड़ प्रतियोगिता रीना देवी मनाहरा शेंशर प्रथम और किरना देवी तुंघ देहूरीधार दूसरे स्थान पर रही।
इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वन मंडलाधिकारी निशांत मंधोत्रा ने सभी विजेताओं को प्रमाण पत्र, ट्रॉफी और अन्य पुरस्कार देकर सम्मानित किया है।

इस वन्य प्राणी सप्ताह 2022 और महिला मेले के सफल आयोजन में ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क तीर्थन रेंज पूरी टीम और बीटीसीए के पदाधिकारीओं ने अपनी अहम भूमिका निभाई है। कार्यक्रम के दौरान इको टूरिज्म फेसलिटेटर गोविन्द सिंह ठाकुर, बीटीसीए के सदस्य लाल चन्द और महिला वन रक्षक खिला देवी ने स्टेज संचालन के कार्य को बखूबी अंजाम दिया है। निर्णायक मंडल में बंजार कॉलेज संगीत विभाग के प्रोफ़ेसर विकास, डीपीआरओ विभाग के हितेश भार्गव और स्थानीय लोकनृत्य की जानकार लीला देवी ने बतौर जज अपना अपना निर्णय दिया है।

दो अक्टूबर को शाई रोपा में हुए इस एक दिवसिय कार्यक्रम में बंजार क्षेत्र के हजारों लोगों सहित कुछ बाहरी राज्यों से आए हुए पर्यटकों ने भी इस महिला मेले को देखने का भरपूर लुत्फ उठाया। सैलानी यहां की प्राचीनतम सभ्यता, संस्कृति और पहनावे को देखकर बागबाग़ हो उठे। कई सैलानी तो इस कार्यक्रम की झलकियों को अपने कैमरों में कैद करके ले गए हैं। इस दौरान स्थानीय लोगों और सैलानियों ने नव निर्मित नेचर लर्निंग पार्क में भी खुब चहल कदमी की है।

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