बिना सरकारी मदद, बिलासपुर में युवक नें लगा दिया चंदन वन
July 24th, 2019 | Post by :- | 960 Views

बिलासपुर में युवक नें बिना किसी सरकारी सहायता के ही बह कर डाला जिसके लिए सरकार लाखों रुपए फूंक देती है। घुमारवीं की पटेर पंचायत के युवक जितेन ठाकुर नें अपनी भूमी पर सैंकड़ों सफेद चंदन के पेड़ तैयार कर क्षेत्र के युवाओं को अपनी जमीन से बेहतर आय लेने का बेहतरीन रास्ता दिखाया है। जितेन ठाकुर ने चंदन के साथ साथ कई दूसरे पौधे जैसे दालचीनी, खुमानी, हरड़ और बहेड़ा भी उगाया है।

जितेन का कहना है कि सरकारी अधिकारियों द्वारा जो स्कीमें दी जाती हैं, वह अपने चहेतों को ही दी जाती हैं ऐसे में अन्य लोगों को कागजों की पेचीदगियों में हीं फंसा दिया जाता है और तब तक मानसून का मौसम निकल जाता है। ऐसे में उन्होंने बिना सरकारी सहायता के ही निचले हिमाचल के लोगों को आय का बेहतर रास्ता दिखाया है।
सफेद चंदन का पेड़ 12 से 15 वर्षों में वयस्क हो जाता है। एक वयस्क पेड़ में लगभग डेढ से दो किवंटल रस्दार लकड़ी (Hart wood)  निकल जाती है। जो 10 से 15 हजार रुपए प्रति किलो बिकती है।


चंदन लगाने के बाद 5वें साल से लकड़ी रसदार बनना शुरू हो जाती है। 12 से 15 साल के बीच यह बिकने के लिए तैयार हो जाता है। कॉस्मेटिक में इसके तेल का प्रयोग किया जाता है, जिसके चलते चंदन की बहुत मांग रहती है। इसके एक वयस्क पेड़ से लगभग 2 से अढाई लीटर तेल निकलता है जिसकी कीमत 13 से 15 लाख प्रति लीटर है।

चंदन के पेड़ की जड़ से सुगंधित प्रोडक्ट्स बनते हैं। इसलिए पेड़ को काटने के बजाए जड़ से ही उखाड़ा जाता है।
उखाड़ने के बाद इसे टुकड़ों में काटा जाता है। ऐसा करके रसदार लकड़ी को कर लिया जाता है।

एवरेज कंडीशन में एक चंदन के पेड़ से करीब 125 किलो तक अच्छी लकड़ी निकल जाती है। इस हिसाब से हर पेड़ लाखों का होता है।
चंदन का पेड़ पांच डिग्री सेल्सियस से पचास डिग्री सेल्सियस तक के तापमान में तैयार होता है। ऐसे में गुजरात की तरह हिमाचल की मिट्टी और मौसम भी चंदन के लिए अनुकूल पाए गए हैं।
जितेन ठाकुर के प्रयास को देखकर बाकी लोगों को भी प्रेरणा मिलने लगी है. लोग अब उन क्षेत्रों में कमाई बाले पौधे रोंपने लगे हैं जहां फसल को जानवर उजाड़ देते हैं। धीरे-धीरे यह प्रयास गति पकड़ रहा है. लोग औषधीय और अन्य प्रकार के फलदार पौधे भी उगाने लगे हैं। ऊपरी हिमाचल में जहां सेब , पलम और नाख जैसे पौधे अच्छा मुनाफा देते हैं, वहीं निचले हिमाचल में चंदन उगाना बेहतरीन विकल्प है। जितेन ठाकुर के इस प्रयास से घुमारवीं की पटेर पंचायत, विश्व मानचित्र पर जगह बनाने की राह पर है।

चंदन की खेती के लिये भी पेड़ों का इंश्योरेंस कराया जा सकता है क्योंकि इन पेड़ों के चोरी होना का खतरा ज्यादा रहता है। यदि इंश्योरेंस रहेगा तो आप निश्चिंत होकर अपने अन्य कामों में व्यस्त रहे सकते  हैं । यह खेती सीसीटीवी की निगरानी में होती है और बिना अनुमति एक बड़ा चंदन का टुकड़ा रखने पर भी आपको कई वर्षों तक जेल की हवा खिला सकता है। ऐसे में इसकी चोरी के असफल प्रयास ढेर हो जाते हैं।

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