नाहन में निर्माणाधीन एनएच 707 का निरीक्षण करने आई वर्ल्ड बैंक की टीम आधे रास्ते से लौटी #news4
September 20th, 2022 | Post by :- | 62 Views

नाहन : जिला सिरमौर में हिमाचल प्रदेश के निर्माणाधीन पहले ग्रीन कारिडोर का निरीक्षण करने पहुंचे वर्ल्ड बैंक की टीम आधे रास्ते से ही लौट गए। वर्ल्ड बैंक की टीम के आने की सूचना मिलने पर ग्रामीण अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे थे। मगर वर्ल्ड बैंक की टीम आधे रास्ते से ही लौट गई, जिसके बाद से ग्रामीणों में भारी रोष है। निर्माणाधीन ग्रीन कारिडोर के निर्माण में लगी कंपनियों की लापरवाही से जहां किसानों की सैकड़ों बीघा भूमि बंजर हो रही है। वही कई लोगों के घरों में ब्लास्टिंग से दरारे पढ़ चुकी हैं। इन सभी समस्याओं को लेकर लोग वर्ल्ड बैंक के अधिकारियों से मिलना चाहते थे। मगर टीम के आधे रास्ते से लौटने के बाद ग्रामीणों को निराशा ही हाथ लगी।

इन दिनों 1356 करोड़ रुपये की लागत से निर्माणाधीन पांवटा साहिब-शिलाई-मीनस-फैडीज एनएच 707 का काम चल रहा है। जिसके निरीक्षण के लिए पहुंची वर्ल्ड बैंक की टीम सोमवार को पहुंची थी। वर्ल्ड बैंक की टीम की ओर से एनएच 707 के पांचों पैकेज का निरीक्षण किया जाना था। इसके चलते रविवार रात को ही निरीक्षण से संबंधित अधिकांश गतिविधियों को निर्माण कार्य कर रही सभी निजी कंपनियों ने अंतिम रूप दे दिया था। सोमवार को जब मीनस तक निरीक्षण के लिए पहुंची, तो यहां से टीम वापिस लौट गई। इस बीच धकोली, गंगटोली, फेडिज आदि स्थानों पर दर्जनों ग्रामीण टीम से मिलने के लिए कई घंटों तक इंतजार करते रहे। ग्रामीण आत्माराम, कपिल, राजेश चौहान, मंगतराम, ज्ञान प्रकाश, गुमान सिंह, उत्तमों देवी, जयंती देवी आदि ने बताया कि निजी कंपनियों की ओर से बेतरतीब ढंग से मलबा डालकर उनके पेयजल स्रोतों को खत्म कर दिया है।

पहाड़ तोडऩे के लिए भारी संख्या में डाइनामाइट का उपयोग और अवैज्ञानिक तकनीक से की जा रही कटिंग के कारण उनके मकानों की बुनियाद हिल रही है और जमीन धंसती जा रही है। इसी सिलसिले में वह वल्‍ड्र बैंक की टीम से मिलकर न्याय की गुहार लगाना चाहते थे, उन्हें मिलने नहीं दिया गया। ग्रामीण बलदेव सिंह, बिशन सिंह, हुकम चंद व सुरेश कुमार आदि ने आरोप लगाए कि केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अधिकारियों और निर्माण कार्य कर रही निजी कंपनियों के कर्मचारियों की ओर से निरीक्षण के दौरान आम जनता को वर्ल्ड बैंक की टीम से मिलने नहीं दिया जाता। अगर सड़क निर्माण का कार्य नियमानुसार किया जा रहा है, तो टीम से अपनी खामियाँ छिपाने की क्या जरूरत है। उधर, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के परियोजना निदेशक विवेक पांचाल ने बताया की वह अभी इस मामले पर फिलहाल वह कुछ नहीं कह सकते।

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