बाल हितों के संरक्षण में अपनाएं संवेदनशील रवैया: यशवंत जैन
June 28th, 2019 | Post by :- | 167 Views

कानूनी प्रक्रिया के साथ मानवीय आधार पर भी मामलों का किया जाए निपटारा
बेंच के सम्मुख प्रस्तुत 26 मामलों पर अधिकारियों को तुरन्त कार्रवाई करने के निर्देश
धर्मशाला 28 जून: बाल हितों को ध्यान में रखते हुए उनके संरक्षण में अधिकारियों को व्यक्तिगत संवेदनशील रवैया अपनाना चाहिए तथा बच्चों एवं किशोरों के प्रति बुरे बर्ताव और शोषण से उनकी रक्षा करने के लिए उनके प्रति दृढ़तापूर्वक अपनी सामाजिक-नैतिक जिम्मेदारी निभाना जरूरी है। यह विचार राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य यशवंत जैन ने आज धर्मशाला के उपायुक्त कार्यालय के सभागार में कांगड़ा ज़िला के अतिरिक्त चम्बा तथा ऊना ज़िलों से सम्बन्धित बाल अधिकारों के उल्लंघन से संबंधित शिकायतों पर सुनवाई एवं उनका निपटारा करने के उपरांत व्यक्त किए । उन्होंने कहा कि यह सभी का सामूहिक दायित्व है कि बच्चों को स्वतंत्र एवं गरिमामय वातावरण उपलब्ध हो ताकि उनका स्वस्थ सर्वांगीण विकास हो सके।
इस दौरान बेंच के सम्मुख बाल अधिकारों के उल्लंघन के संबंध में सुनवाई के लिए कुल 26 शिकायतें प्रस्तुत हुईं जिनमें से कांगड़ा ज़िला से सम्बन्धित 17 शिकायतें सुनवाई के लिए प्राप्त हुईं जबकि ऊना ज़िला से 6 तथा चम्बा ज़िला से 3 मामलें सुने गए। बेंच ने प्राप्त शिकायतों पर कड़ा संज्ञान लेते हुए संबंधित विभागीय अधिकारियों को इन मामलों पर समयबद्व अवधि में निपटारा करने के सख्त निर्देश दिए।
जैन ने बताया कि आयोग के दो- दो सदस्यीय बेंच देश के अन्य राज्यों में भी बाल हित के मामलों में प्राप्त शिकायतों पर सुनवाई कर रहे हैं तथा इस प्रकार के आयोजनों का मुख्य उददेश्य बाल हितों की पूर्ण रक्षा सुनिश्चित बनाना है। उन्होंने कहा कि 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों से किसी भी तरह का सेक्सुअल बर्ताव पॉक्सो (प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फरॉम सेक्सुअल ऑफेंस) एक्ट के दायरे में आता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऐसा मामला ध्यान में आने पर तुरन्त पुलिस को सूचना देकर एफआईआर दर्ज करवाने की प्रक्रिया अमल में लाई जाए। ऐसे मामलों को जानबूझ कर छुपाने या इसमें देरी करने पर संबंधित अधिकारी के विरूद्व भी कार्रवाई के साथ सजा का प्रावधान है।
उन्होंने कहा कि संविधान में बच्चों को अन्य अधिकार भी प्रदान किये गये है तथा इन अधिकारों की पूर्ण अनुपालना सुनिश्चित बनाना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि संविधान में शिक्षा का अधिकार तथा जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत प्रदान अधिकारों के प्रति अधिकारियों को विशेष निगरानी रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा का अधिकार एक्ट के तहत 14 वर्ष तक आयु के बच्चों को शिक्षा प्रदान करना अनिवार्य बनाया गया है तथा इस एक्ट के तहत बनाए गये नियमों की पूर्ण अनुपालना सुनिश्चित करवाने के लिए उन्होंने शिक्षा विभाग के अधिकारियों को सख्त हिदायत दी। उन्होंने शिक्षा विभाग के अधिकारियों को प्राइवेट स्कूलों में गरीब परिवारों के 25 प्रतिशत बच्चों को निःशुल्क शिक्षा देने सहित उनके द्वारा बसूली जाने वाली स्कूल फीस पर भी कड़ाई से अनुपालना सुनिश्चित बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी अधिकारियों से उनके क्षेत्र में निवास करने वाले बाहरी राज्यों के लोगों के बच्चों को शिक्षा प्रदान करने पर विशेष ध्यान देने के भी निर्देश दिए।
जैन ने स्कूल बसों तथा अनुबन्धित की गई टेक्सियों में ओवरलोडिंग तथा ओवरस्पीड के मामलों में परिवहन विभाग तथा शिक्षा विभाग को नियमित चेकिंग करने तथा सर्वोच्च न्यायालय द्वारा मोटर वाहन अधिनियम के तहत पारित हिदायतों की पूर्ण अनुपालना सुनिश्चित बनाने को कहा । इसके अतिरिक्त वाहन चालकों तथा बस सहायक की अनिवार्य तौर पर पुलिस वेरिफिकेशन करवाने पर भी कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
उन्होंने क्षेत्र में भिखारियों की बढ़ती हुई संख्या के मामलें सामने आने पर अपनी चिंता व्यक्त करते प्रशासन तथा पुलिस विभाग को नियमित तौर पर चेकिंग करने व ऐसी गतिविधियों पर तुरन्त रोक लगाने के भी निर्देश दिए। विशेषकर प्रवासी बच्चों द्वारा भीख मांगने या उनके नाम पर भीख मांगने वाली औरतों पर कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को ऐसे प्रवासी परिवारों के पालन पोषण के लिए किसी रोजगार में जोड़ने की दिशा में कार्य करने पर बल दिया ताकि उन्हें भीख मांगने जैसी समस्या से मुक्ति मिल सके।
आयोग की सदस्य रोजी ताबा ने इस अवसर पर आंगनबाड़ी कार्यकत्ताओं से भी बैठक की। उन्होंने आंगनबाड़ी केन्द्रों में गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान तथा शिशु के जन्म के छः माह से छः वर्ष उपलब्ध करवाई जा रहे पोषाहार पर जानकारी ली। उन्होंने उपस्थित कार्यकत्ताओं को आंगनबाड़ी में आने वाले बच्चों को ‘गुड एंड बेड हेबिटस’ विषय पर विशेष जानकारी देने पर बल दिया। उन्होंने नन्हें मुन्ने बच्चों को कार्टून के माध्यम से ऐसी सभी ज्ञानवर्धक जानकारियां देने को कहा जिससे उन्हें अपने हितों के संरक्षण के साथ-साथ नर्सरी में पढ़ाई करने पर मद्द मिल सके।
ताबा ने बच्चों के अपहरण तथा बाल मजदूरी के मामलों में पुलिस तथा प्रशासन को विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बच्चों के हितों को ध्यान में रखते हुए क्षेत्र में अनाधिकृत तथा गैर कानूनी तरीके से चल रहे बाल आश्रमों तथा बाल सुधार गृहों पर विशेष कार्रवाई करने के भी निर्देश दिए।
इससे पहले, अतिरिक्त उपायुक्त राघव शर्मा ने आयोग के सदस्यों का स्वागत किया। उन्होंने सदस्यों को अवगत करवाया कि ज़िला में बाल अधिकारों के संरक्षण के मामलों में पूरी सावधानी बरती जा रही है तथा इसके तहत कोई भी मामला ध्यान में आने पर प्रशासन व सभी अन्य विभाग पूरी तत्परता से कार्य कर रहे हैं।
ये रहे मौजूद
इस मौके पर ज़िला विधिक साक्षरता सेवा प्राधिकरण के सचिव अमित मंडयाल, प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग की सदस्य कुसुम वर्मा, महिला एवं बाल विकास विभाग के सयुंक्त निदेशक आरएस गुलेरिया, ज़िला कार्यक्रम अधिकारी रणजीत सिंह, एनसीपीसीआर की कंसलटेंट पायल शर्मा, जौहरा झमन, दिप्ति बहल सहित शक्ति सिंह, प्रशांत चौहान ज़िला बाल कल्याण समिति की अध्यक्षा चमेली देवी, सभी एसडीएम, पुलिस व प्रशासन के अन्य अधिकारी, गैर सरकारी संगठनों के सदस्य, बाल बालिका आश्रमों के सदस्य एवं प्रतिनिधि और सम्बन्धित विभागों के अधिकारियों सहित अन्य हितधारक उपस्थित थे।

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