हल्दी की गांठ से बनी गणेश प्रतिमा की भी कर सकते हैं पूजा
September 2nd, 2019 | Post by :- | 154 Views

सोमवार, 2 सितंबर से गुरुवार, 12 सितंबर तक गणेश उत्सव मनाया जाएगा। गणेशजी प्रथम पूज्य देव हैं और इनके अलग-अलग स्वरूपों की पूजा करने की परंपरा पुराने समय से चली आ रही है। किसी भी शुभ काम की शुरुआत गणेशजी के पूजन के साथ ही होती है, इससे कार्य में सफलता मिलती है, सभी काम बिना किसी विघ्न के पूरे हो जाते हैं। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार मिट्टी की गणेश प्रतिमा के साथ ही गणेशजी के अन्य स्वरूपों को भी घर में स्थापित किया जा सकता है। जानिए श्रीगणेश के 4 ऐसे स्वरूप, जिनकी पूजा से घर-परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है…

  • हल्दी की गांठ से बने गणेश

हल्दी की ऐसी गांठ चुनें, जिसमें श्रीगणेश की आकृति दिखाई दे रही हो। इस हल्दी की गांठ में गणेशजी का ध्यान करते हुए हर रोज पूजन करना चाहिए। पीसी हुई हल्दी में पानी मिलाकर भी गणेश प्रतिमा बना सकते हैं। ये गणेश प्रतिमा भी पूजन के लिए श्रेष्ठ मानी गई है। अगर सोने की धातु से बनी गणेश प्रतिमा नहीं है तो हल्दी से बनी गणेश प्रतिमा का पूजन किया जा सकता है। सोने से बनी और हल्दी से बनी, गणेश प्रतिमा एक समान पुण्य फल प्रदान करती है।

  • गोमय यानी गोबर से बनी गणेश मूर्ति

गाय को माता माना जाता है। गौमाता पूजनीय और पवित्र हैं। गाय के गोबर यानी गोमय में महालक्ष्मी का निवास माना गया है। यही वजह है कि गोमय से बनी गणेश मूर्ति की पूजा लाभ देने वाली मानी गई है। गोबर से गणेशजी की आकृति बनाएं और इस प्रकार तैयार की हुई गणेश प्रतिमा का पूजन करें। पुराने समय में सुख-समृद्धि की कामना से हर रोज घर की जमीन पर गोबर लिपा जाता था। इससे घर का वातावरण पवित्र और सकारात्मक बना रहता है।

  • लकड़ी के गणेश

भगवान की मूर्तियों के लिए पीपल, आम, नीम आदि की लकड़ी बहुत शुभ मानी गई है। लकड़ी से बनी भगवान गणेश मूर्ति को घर के मुख्य दरवाजे के बाहर ऊपरी हिस्से पर लगा सकते हैं। रोज इस प्रतिमा की पूजा करने पर घर का वातावरण शुभ बना रहता है और लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।

  • श्वेतार्क गणेश

सफेद आंकड़े की जड़ में गणेशजी की आकृति (मूर्ति) बन जाती है। इसे श्वतार्क गणेश कहा जाता है। इस मूर्ति की पूजा से सुख-सौभाग्य बढ़ता है। श्वेतार्क गणेश की मूर्ति घर लेकर आएं और नियमित रूप से विधि-विधान के साथ पूजा करनी चाहिए।

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