नई मांओं के लिए कुछ टिप्स, ताकि आप अपना मदरहूड एंजॉय कर सकें! #news4
December 3rd, 2022 | Post by :- | 118 Views

मां बनने का एहसास काफ़ी सुखद होता है और पहली बार बनने की ख़ुशी अतुलनीय होती है. पर इसके साथ ही आती हैं असंख्य ज़िम्मेदारियां और चुनौतियों की लंबी कतार. विशेषज्ञों के अनुसार फ़ोर्थ ट्रायमेस्टर  का दौर सबसे कठिन होत है. इस पीरियड में नई मां भावनात्मक और शारीरिक रूप से सबसे कमज़ोर होती है और उसे अधिक से अधिक देखभाल की ज़रुरत होती है. पहला बच्चा आपको अनजाने क्षेत्र में लेकर जाता है, जहां आपके लिए लगभग सबकुछ नया होता है. साथ ही हॉर्मोनल अस्थिरता, नवजात शिशु की देखभाल करने का तनाव, सामाजिक अपेक्षाओं पर खरा उतरने की कोशिश और अपने शारीरिक बदलाव को ठीक से न जानने के कारण यह दौर कठिन और थकाऊ होता है. हॉर्मोनल बदलावों से निपटने से लेकर अपनी दिनचर्या को अपने बच्चे की ज़रुरतों के अनुसार सेट करने, बच्चे के रोने के कारणों को समझने से लेकर अपने साथी के साथी के साथ अपने संबंधों को फिर से बनाने और यदि अपने प्रोफ़ेशन को फिर से ठीक करने की सूची फिर से बढ़ती रहती है.

आपके जीवन के नए दौर में आपकी मदद करने के लिए हम यहां कुछ टिप्स दे रहे हैं, ताकि आपका यह सफ़र आसान हो सके!

ज़रूरी नहीं कि आप हर काम में परफ़ेक्ट हों

नई मांओं के लिए शुरुआती कुछ महीने अक्सर तनाव भरे होते हैं. हर छोटी चीज़ में सर्वश्रेष्ठ होने का अक्सर अंदर से एक तरह का दबाव बना रहता है. बच्चे की सही देखभाल होनी चाहिए, घर साफ़-सुथरा और बेदाग़ होना चाहिए और काम पूरी गति से आगे बढ़ना चाहिए- इन चिंताओं के साथ आगे बढ़ते हुए, नई मां अक्सर यह भूल जाती हैं कि उद्देश्य सिर्फ़ बच्चे और ख़ुद को एक सुरक्षित और प्यार भरा वातावरण प्रदान करना है और इसका मतलब है कि यह स्वीकार करें कि आपसे गलतियां होंगी. परफ़ेक्ट या आदर्श मां बनने के के बारे में अधिक ना सोचें. बच्चे कीछोटी-छोटी गतिविधियों में शामिल हों, यह आपको ख़ुश रखेंगी. थोड़ा लंबे समय तक स्नान करें, पहले की तरह ही शांति से दोपहर का भोजन करें और बैठते समय अपने पैर ऊपर रखें, इससे आप रिलैक्स महसूस करेंगी. शिशुओं को आपकी देखभाल की ज़रूरत होती है, लेकिन लगातार उनके चारों तरफ़ घूमने की ज़रुरत नहीं. बच्चों का रोना स्वाभाविक है और अगर आप उसे तुरंत चुप या शांत नहीं करा पा रहे हैं तो माता-पिता के रूप में इसे अपनी विफलता न समझें. आपको जो भी मदद मिल सकती है, लें- साथी, परिवार, दोस्त, या कोई भी जो आपको मिल सकता है, क्योंकि एक बच्चे के पालन-पोषण के लिए एक बड़े परिवार की आवश्यकता होती है!

प्रसव के बाद के तनाव से सावधान रहें

प्रसव के बाद की अवधि में होने वाला तनाव, अक्सर शांत होता है और इसे गंभीरता से नहीं लिया जाता है, लेकिन यह ज़रूरी है कि आप इसके बारे में ध्यान में रखें. कोशिश करें और अपनी भावनाओं को समझें और ज़रूरत से ज़्यादा ना सोचें. जहां एक तरफ़ शिशु के साथ बिताया जाने वाला समय रोमांचक और ख़ुशनुमा हो सकता है, वहीं आप अलग-अलग दिशाओं में भी सोचने के लिए बाध्य हो जाते हैं और भावनात्म रूप से डंवाडोल हो जाते हैं. इसके लिए अपने चिकित्सक और दोस्तों से बात करें और पता लगाएं कि इस सोच से निपटने में आपको उन से क्या मदद मिल सकती है. अतिरिक्त सहायता से आपको चीज़ों को बेहतर तरीक़े से व्यवस्थित करने में मदद मिल सकती है और आपको नींद लेने या अपनी देखभाल करने के लिए कुछ समय भी मिल सकता है. अगर बच्चे के जन्म के बाद आपका स्वास्थ्य ठीक नहीं है या आप किसी चिकित्सकिय समस्या से परेशान हैं, तो अपने डॉक्टर से सलाह लें और उनके सुझावों का पालन करें.

इस बात को स्वीकार करें कि आपके शरीर में बदलाव आया है

एक नए जीवन को इस दुनिया में लाने के बाद आपके शरीर में कई बदलाव आते हैं. महिलाओं का वज़न काफ़ी बढ़ जाता है, जिससे यह सौंदर्य और स्वास्थ्य दोनों में कमी आ जाती है. हालांकि आपको इसके बारे में अधिक ना सोचें और अपने नए शिशु के साथ अच्छा समय बिताएं. इसके साथ यह याद रखें कि आप एक नए जीवन को इस दुनिया में लाने का माध्यम बनी हैं. बस कुछ समय बाद अपने डॉक्टर के सलाह पर एक्सरसाइज़, योग और अन्य गतिविधियों में सक्रिय रहें. आप की मेहनत जल्द ही अच्दे परिणाम देगी और आप पहले की तरह ही अपने वज़न पर क़ाबू पा लेंगी.

मातृत्व को खुल कर जिएं!

हम जिस तरह की मां बनने के बारे में सोचती हैं, वह अक्सर उस मां से बहुत अलग होती है जो हम बन पाती हैं और यही वह सच्चाई है जिसे हमें स्वीकार करने की ज़रुरत होती है. मां बनने का रास्ता बहुत कठिन होता है, इससे आपकी पहचान भी बदलती है. अपनी दैनिक गतिविधियों को दोबारा से निर्धारित करने से लेकर अपने बच्चे की भलाई के बारे में हर निर्णय लेने तक और ज़िंदगी को दोबारा पहले की तरह पटरी पा लाने में समय लगता है. इसलिए हड़बड़ाएं नहीं. चीज़ों को समय दें और मातृत्व को खुल कर जिएं!

नोट: यह आर्टिकल वुमन्स कंपनी की सीईओ व फ़ाउंडर अनिका पराशर के इनपुट्स पर आधारित है.

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